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उपेक्षा से नाराज राहुल ?

02/11/2019

उपेक्षा से नाराज राहुल ?

जितेन्द्र चतुर्वेदी

राहुल गांधी नाराज हैं। इसलिए विदेश चले गए थे। वह भी चुनाव के समय। वे पहले भी ऐसा कर चुके हैं। तब दिल्ली का चुनाव था। उस समय भी सहयोगियों की उपेक्षा से नाराज थे। यही स्थिति इस बार भी बताई जा रही है। उनके करीबियों को हाशिए पर धकेला जा रहा है। कर वे रहे हैं जो सोनिया गांधी के करीबी हैं। चूंकि पार्टी की बागडोर उनके हाथ में है इसलिए चल भी उनके करीबियों की रही है। इन्हें ओल्ड गार्ड कहा जाता है। ये लोग राहुल और उनकी टीम को नापसंद करते हैं। उसका कारण व्यक्तिगत नहीं। उसकी असल वजह राजनीतिक है। पुरानी पीढ़ी, नई को काबिल मानने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस में यह नई बात नहीं है। इंदिरा गांधी के समय में भी इसी तरह का गतिरोध बना था। ओल्ड गार्ड उनकी राजनीति खत्म करने पर उतारू थे और वे ओल्ड गार्ड को खदेडने पर। संघर्ष चला पर जीत इंदिरा गांधी की हुई। उन्होंने गांधी होने का फायदा उठाया। पार्टी तोड़ ली। जो नई पार्टी बनी, वह कांग्रेस इंदिरा है। उसे ही कांग्रेस आई कहा जाता है। उसी विरासत से राहुल हैं। कायदे से उन्हें भी दादी की राह पर चलना चाहिए और पार्टी को ओल्ड गार्ड से मुक्त करना चाहिए।

यह तो राहुल गांधी को तय करना
है कि वे क्या करेंगे। लेकिन उनके
करीबियों का मानना है कि राहुल
टीम को दरकिनार किया जा रहा है।
अशोक तंवर और संजय निरुपम का
तो यही दावा है।

जरूरत पड़े तो उन्हें पार्टी भी तोड़ लेना चाहिए। वैसे कांग्रेस बहुत कठिन दौर से गुजर रही है। उस पर अगर युवाओं को पार्टी से बाहर किया जाएगा तो संगठन चलेगा कैसे। हालाकि यह तो राहुल गांधी को तय करना है कि वे क्या करेंगे। लेकिन उनके करीबियों का मानना है कि राहुल टीम को दरकिनार किया जा रहा है। अशोक तंवर और संजय निरुपम का तो यही दावा है। अशोक तंवर तो हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हुआ करते थे। उन्हें कुर्सी राहुल की कृपा से मिली थी। भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को हटाया गया था। तब वे बागी हो गए थे। लेकिन राहुल गांधी टस से मस नहीं हुए थे। उनके लाख विरोध के बाद भी अशोक तंवर को नहीं हटाया गया था। मगर जैसे राहुल गांधी ने कुर्सी छोड़ी, अशोक तंवर पर संकट के बादल मंड़राने लगे। वह तब और गहरा गया जब भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने नई पार्टी बनाने का बिगुल बजा दिया।

इससे कांग्रेस सकते में आ गई। उसने भूपेन्द्र के बजाय अशोक तंवर की बलि देना ज्यादा मुनासिब समझा। लिहाजा अशोक के हाथ से कुर्सी चली गई। उसे तंवर ने मुद्दा बना लिया है। वे कह रहे हैं कि राहुल टीम को परेशान किया जा रहा है। कमोवेश इसी तरह का आरोप संजय निरूपम भी लगा रहे हैं। उनका दावा है कि राहुल गांधी से जुड़े लोगों को उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। हालांकि कांग्रेस इस तरह के दावों को खारिज कर रही है। उसका कहना है कि संजय निरूपम टिकट चाहते हैं। इसलिए बागी बने हैं। खैर वजह जो भी हो, पर इतना तो माना जा रहा है कि राहुल टीम पर गाज गिर रही है। यह बात राहुल गांधी को पसंद नहीं आई। लिहाजा उन्होंने हस्तक्षेप करने के बजाए खुद को चुनाव से अलग कर लिया।


 
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