युगवार्ता

Blog single photo

इस बार मनेगी दीवाली त्रेता वाली

30/10/2019

इस बार मनेगी दीवाली त्रेता वाली

संजय सिंह

इस बार दीपोत्सव पर त्रेतायुग के दृश्यों व झांकियों को जमीन पर उतारने की तैयारी है। योगी सरकार इस वर्ष 5.50 लाख दीपक जलाकर अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए दीपोत्सव को गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करायेगी।

राम की नगरी में इस बार दीपोत्सव का आयोजन बेहद खास होने वाला है। रामभक्तों को जहां फैसला अपने पक्ष में आने की उम्मीद है, वहीं दीपोत्सव पर अयोध्या पूरी तरह राममय नजर आएगी। जगह-जगह रामायण की चौपाइयां और भजनों की गूंज होगी। देश के साथ विदेशी कलाकारों की रामायण प्रस्तुति इस मौके को और भी खास बनाएगी। दीपोत्सव पर त्रेतायुग के दृश्यों व झांकियों को जमीन पर उतारने की तैयारी है। योगी सरकार इस वर्ष 5.50 लाख दीपक जलाकर अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए दीपोत्सव को गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करायेगी। इस बार साढ़े पच्चीस हजार लीटर सरसों के तेल से जलाए गए दीयों की रोशनी से रामनगरी प्रज्ज्वलित हो उठेगी।
राम की पैड़ी के साथ अन्य 14 प्रमुख स्थलों पर मिट्टी के दीये जगमगाएंगे। 45 मिलीलीटर तेल की क्षमता वाला एक-एक दीया तीन घंटे जलेगा। 26 अक्तूबर को भगवान राम, माता सीता व अनुज लक्ष्मण के स्वरूप को लेकर पुष्पक विमान अयोध्या में उतरेगा। दूसरी तरफ हेलीकॉप्टर पूरे अयोध्या में पुष्प वर्षा करेगा जो अपने आप में अद्भुत दृश्य होगा। इसी के साथ दीपोत्सव कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत होगी।
दीपोत्सव से पहले पंचकोसी परिक्रमा और रन फॉर आस्था के कार्यक्रम भी होंगे। रामकथा पार्क में बने दीपोत्सव के मुख्य मंच सहित नगर के अन्य 11 मंचों से रामकथा पर आधारित सांस्कृतिक संध्या सजेगी। इसके साथ भरतकुंड, आईटीआई साकेत पीजी कॉलेज, बिड़ला धर्मशाला, दशरतथमहल, कनकभवन, तुलसीउद्यान, हनुमानबाग, झुनकीघाट व भजन संध्या स्थल पर कई कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इन कार्यक्रमों में भजन, लोक गायन, नृत्य नाटिका, धोबिधा लोक नृत्य, धोबिया लोक नृत्य, बिरहा, जादू, भोजपुरी संगीत फरवाही लोक नृत्य, नंदराजात नृत्य, राम राज्याभिषेक नृत्य व रामलीला शामिल होगी। प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी के मुताबिक राम की पैड़ी पर चार लाख तथा अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर डेढ़ लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।
पिछले साल अयोध्या में तीन लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व कीर्तिमान बनाया गया था। सरयू के जल से पहली बार हर की पौड़ी की तरह अविरल प्रवाहमान होने जा रही राम की पैड़ी में कुम्भ जैसा स्नान का उत्साह देखने को मिलेगा। पैड़ी पर 64 मीटर का नया घाट निर्मित किया गया है। पानी जहां μलो होना है वहां आरसीसी बेड बनाए गए हैं। सहस्रधारा घाट पर पंप हाउस बनाया गया है जहां से सरयू का पानी राम की पैड़ी में अविरल रूप से प्रवाहित होगा। दीपोत्सव कार्यक्रम के पहले ‘रन फॉर आस्था’ कार्यक्रम का आयोजन कराकर पंचकोसी परिक्रमा कराई जाएगी।
दीपोत्सव कार्यक्रम में सम्पूर्ण अयोध्या को दीपों से प्रकाशित कराने के लिए सरकारी भवनों सहित सार्वजनिक स्थानों में दीप जलाए जाएंगे। बेहतर दीपोत्सव कराने वाले सरकारी भवनों सहित सामाजिक संस्थाओं को पर्यटन विभाग पुरस्कृत भी करेगा। दीपोत्सव कार्यक्रम में भाग लेने वाले श्रेष्ठ 51-51 बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों को भी पर्यटन विभाग पुरस्कृत करेगा।

विदेशी करेंगे रामलीला
दीपोत्सव के दौरान मॉरीशस, थाईलैंड, सूरीनाम, इंडोनेशिया एवं नेपाल की मंडलियां रामलीला की प्रस्तुति कर समां बाधेंगी। यह सभी मंडलियां 26 अक्टूबर को दीपोत्सव के दिन रामकथा पार्क के मंच से प्रस्तुति देंगी। इसके अलावा 24 एवं 25 अक्टूबर को गुप्तारघाट एवं नयाघाट मंच पर भी लीला करेंगी। हर मंडली में आठ से बारह कलाकार विभिन्न रामकथा प्रसंगों का मंचन करेंगे। वहीं रामकथा पर आधारित चित्रकला प्रदर्शनी भी आकर्षण का केन्द्र होगी। रामकथा संग्रहालय प्रदर्शनी में देश के चुनिंदा 10 कलाकारों सहित श्रीलंका के पांच कलाकारों की भी कृतियां प्रदर्शित होंगी। दीपोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में राजा राम दशम उपाधिधारी थाईलैंड के राजा वजीरालोंगकोर्न मौजूद रहेंगे।

अयोध्या का पूरक है दीपोत्सव

मुख्यमंत्री के मुताबिक अयोध्या के पौराणिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि पूरी दुनिया से यहां रामभक्त श्रद्धालु आते हैं। पूर्व की सरकारों ने इसकी उपेक्षा की और अयोध्या का वैसा विकास नहीं हो पाया, जिसकी वह हकदार है। इसलिए सत्ता में आते ही इस दिशा में कार्य किया गया। दीपोत्सव के जरिए भी अयोध्या को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलायी जा रही है। सरकार ने दीपोत्सव के लिए बजट भी मंजूर किया। हर दीपावली के साथ आयोजन का स्वरूप और भव्य होता जा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक अयोध्या में पहले दीपावली पर शस्त्र पूजन आदि कर लिया जाता था, लेकिन हमारी सरकार ने संतो से बात कर सामूहिक रूप से दीपोत्सव मनाने की परम्परा शुरू की। इसलिए अयोध्या के साथ दीपोत्सव अब जुड़ चुका है। अयोध्या में पहले धर्मशालाएं हुआ करती थीं, लेकिन अब अयोध्या का सर्वांगीण विकास हो रहा है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह के मुताबिक जनसहभागिता से भव्य रूप में दीपोत्सव मनाया जाएगा। दीपोत्सव पर पांचों दिन जल-थल व नभ से सुरक्षा की अभेद्य व्यवस्था रहेगी। अयोध्या में धारा 144 लागू है, लेकिन दीपोत्सव व परंपरागत मेले के उत्साह में इसका कोई असर नहीं हो, इसके लिए पूरी तैयारी की गई है। जिस तरह इस वर्ष कुम्भ आयोजन की चर्चा पूरे विश्व में हुई, उसी तरह दीपोत्सव की भी चर्चा होगी। इसके साथ ही अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आने वाले फैसले को देखते हुए भी पुलिस महकमे ने वहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की व्यवस्था की है। वहीं प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस प्रशासन के सभी अफसरों की छुट्टियां 30 नवम्बर तक के लिए रद्द कर दी हैं। उन्हें अपने-अपने मुख्यालय में ही रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।

अयोध्या के विकास पर नजर
दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जन्मभूमि के चहुंमुखी विकास को लेकर बेहद गंभीर है। इसके अलावा विश्व पयर्टन के मंच पर भी अयोध्या को प्रतिष्ठित कराने के लिए उनकी सरकार लगातार प्रत्यनशील रही है। सरकार ने विकास के एजेंडे में धार्मिक स्थलों का विशेष ध्यान रखा है। रामनगरी में विश्व की सबसे ऊंची 221 मीटर की भगवान श्रीराम की विशालकाय मूर्ति स्थापित करने की कवायद तेज हो गई है। सरकार ने बजट में 200 करोड़ की व्यवस्था की है। अनुपूरक बजट में अयोध्या स्थित राम की पैड़ी की रिमॉडलिंग के लिए 10 करोड़, दीपोत्सव के लिए 6 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा के मार्ग पर जनसुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
प्रत्येक पांच किलोमीटर पर विश्रामालय, पैदल मार्गों व वाहन मार्गों की पृथक व्यवस्था से लेकर सरयू रिवरफ्रण्ट विकसित करने का काम हो रहा है। रामायण सर्किट (अयोध्या) के तहत रामकथा पार्क, दिगम्बर अखाड़ा-बहुद्देशीय हॉल, राम की पैड़ी, बुद्धिस्ट सर्किट (कुशीनगर) के तहत पार्किंग, सोलर लाइटिंग, वेस्ट मैनेजमेण्ट, पहुंच मार्ग, सीसीटीवी एण्ड वाईफाई सम्बन्धी योजनाएं पूर्ण हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस तरह की पहल से योगी सरकार ने कई लक्ष्य साधने का कार्य किया है। योगी आदित्यनाथ की छवि कट्टर हिन्दुत्व वाले नेता की रही है। वहीं राम मंदिर को लेकर भी भाजपा का एजेण्डा जगजाहिर है।
ऐसे में मंदिर को लेकर भले ही सरकार के हाथ में कुछ नहीं हो, लेकिन अयोध्या के विकास और धार्मिक आयोजनों के जरिए सरकार ने बिना कुछ कहे एक स्पष्ट संदेश दिया है। वह रामराज की बात करती है और राम की नगरी में उनसे जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए श्रद्धालुओं को प्रसन्न करने में भी सफल रही है। इसके साथ ही तीर्थाटन, पर्यटन को नई दिशा मिलने से स्थानीय निवासियों को लाभ मिलेगा। ऐसे में विपक्ष चाहकर भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरने में सफल नहीं हो पा रहा है।


 
Top