युगवार्ता

Blog single photo

मंदिर की दिशा में पहला कदम

17/02/2020

मंदिर की दिशा में पहला कदम

संजय सिंह

जिन रामलला को तंबू से बाहर निकालकर भव्य मंदिर में विराजमान करने की इच्छा लिए कितनी पीढ़ियां परलोक चली गईं। अंग्रेजों की दास्तां से देश को तो 1947 में आजादी मिल गई, लेकिन रामलला अपनी ही नगरी, अपने ही आंगन, महल में अनन्य भक्तों की इच्छा के बावजूद भव्य रूप से विराजमान होने को तरसते रहे। त्रेता युग में तो उनका वनवास 14 वर्षों का था, लेकिन यहां इसका अंत होता नहीं दिख रहा था। वह कानूनी हक हासिल करने के बाद अब ट्रस्ट का स्वरूप तय होने के फलस्वरूप अपने महल में जल्द ही सुकून से निवास कर सकेंगे। भक्त रूपी प्रजा अपने राजा के सुविधाजनक तरीके से दर्शन कर सकेगी, उनसे फरियाद कर पायेगी। लगभग पांच सौ वर्षों की लड़ाई का सुखद अंत होने के साथ अब शुभ घड़ी की शुरुआत हो गई है। यही वजह है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के गठन होने के साथ ही अब रामभक्तों के चेहरे पर खुशी का भाव दिखने लगा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसद में ट्रस्ट की घोषणा के साथ ही राम मंदिर निर्माण की तस्वीर साफ हो गई है। अयोध्यावासियों ने जहां दीये जलाकर इसका स्वागत किया। वहीं अब रामनगरी में आम जनता बेसब्री से मंदिर निर्माण कार्य का शुभारम्भ होने का इंतजार कर रही है।

ट्रस्ट का गठन होने के बाद अधिग्रहीत परिसर के रिसीवर व अयोध्या के मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल ने अधिग्रहीत भूमि मंदिर निर्माण के लिए नवगठित ट्रस्ट को सौंप दी है। मंडलायुक्त ने अपना प्रभार भी ट्रस्ट के प्रतिनिधि के तौर पर विमलेंद्र मोहन मिश्र को सौंपा है। अभी तक मंडलायुक्त अधिग्रहीत परिसर के कस्टोडियन थे। इसके तहत श्रीरामजन्मभूमि विवाद को लेकर अधिग्रहीत की गई चल अचल संपत्तियों समेत रामलला को चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुई धनराशि, सोना-चांदी को हस्तांरित किया गया। चढ़ावे में धातुएं जिस रूप में प्राप्त हुई हैं, उसी रूप में राजकीय कोषागार अयोध्या में संरक्षित हैं। ट्रस्ट की सभी संपत्तियों पर कब्जा देने के साथ इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन ने गृह मंत्रालय भारत सरकार को भेज दी है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई समय सीमा के भीतर ही अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बनाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का गठन कर मोदी सरकार ने अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन किया है। लेकिन ट्रस्ट में शामिल न किये जाने को लेकर संतों के एक वर्ग की नाराजगी ने श्रद्धालुओं को निराश किया, इसमें दो राय नहीं। हालांकि मनाने के बाद नाराज संत मान गये हैं। राम मंदिर की दिशा में बढ़े इस पहले कदम के ईर्दगिर्द इस बार की आवरण कथा।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी गई संपत्तियों की बात करें तो अचल संपत्ति में अधिगृहीत क्षेत्र अयोध्या को कब्जे में लेकर तैयार इन्वेंट्री -भारतीय स्टेट बैंक शाखा अयोध्या बचत खाता संख्या-10294091088 में जमा 28110264.83 रुपये हैं। सावधि जमा में भारतीय स्टेट बैंक शाखा अयोध्या -87 फिक्स डिपॉजिट 87554058 रुपये हैं। इसके साथ ही धातुओं में राजकीय कोषागार अयोध्या में रखा गया सोना 230.42 ग्राम, चांदी-50 19.98 ग्राम व अन्य 1531.52 ग्राम हैं। बहरहाल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रस्ट का गठन किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट पूरी तरह स्वतंत्र एवं मंदिर निर्माण से संबंधित सभी निर्णय लेने में सक्षम होगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि ट्रस्ट बनाने के फैसले से भव्य मंदिर निर्माण का सदियों से सपना संजोए करोड़ों श्रद्धालुओं का इंतजार खत्म होगा। ट्रस्ट में सामाजिक समरसता पर बल देते हुए दलित समाज को प्रतिनिधित्व देकर हिंदुत्व की सामाजिक समरसता की विचारधारा और भारत की एकता व अखण्डता को ताकत देने का काम किया गया है।

पांच एकड़ जमीन मिली
खास बात है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट और मस्जिद के लिए जमीन का ऐलान एक ही दिन हुआ। संसद में ट्रस्ट की घोषणा के बाद ही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन देने सम्बन्धी कैबिनेट के फैसले के बारे में बताया। इसके तहत अयोध्या मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर ग्राम धानीपुर, तहसील सोहावल रौनाही थाने के 200 मीटर के पीछे पांच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन दी जाएगी। प्रदेश सरकार ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को जमीन आवंटित करने का लेटर भी जारी कर दिया है। इस जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड मस्जिद बनाए या फिर कुछ और यह फैसला उसे करना है। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैयद मोहम्मद शोएब ने इस सम्बन्ध में 24 फरवरी को एक बैठक बुलायी है। इसी बैठक में बोर्ड के आठ सदस्यों के बहुमत के आधार पर सरकार से पांच एकड़ जमीन लेने पर फैसला होगा।

जिंदगी की सबसे बड़ी अभिलाषा होगी पूर्ण: कल्याण सिंह

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने ट्रस्ट के गठन को लेकर कहा कि अब उम्मीद है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर उनके जीवन काल में बनकर तैयार हो जाएगा और वह अयोध्या जाकर वहां दर्शन कर जिंदगी की सबसे बड़ी अभिलाषा पूर्ण कर सकेंगे। अयोध्या में ढांचा ध्वंस मामले में न्यायालय से एक दिन की सजा पाने वाले कल्याण ने कहा कि वह पहले भी कह चुके हैं कि रामलला के जन्मस्थान पर मंदिर के लिए एक नहीं जीवन भर के लिए जेल में रहने को तैयार हैं। राम मंदिर के लिए एक नहीं सैकड़ों सत्ता कुर्बान कर सकते हैं। इसलिए अब जब मंदिर बनने जा रहा है तो मुझसे ज्यादा खुशी किसको होगी। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि ट्रस्ट में दलित समाज के व्यक्ति के साथ पिछड़े समाज को भी प्रतिनिधित्व मिलता तो और बेहतर होता।

मोहम्मद शोएब के मुताबिक जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था, तभी बोर्ड बैठक में आठ में से सात सदस्यों ने इस फैसला का स्वागत किया था। अगर इस बैठक में भी पिछले बार जैसा ही हुआ तो पांच एकड़ जमीन ले ली जायेगी। दूसरी तरफ आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एडवोकेट जफरयाब जिलानी ने पांच एकड़ जमीन दिये जाने को सही नहीं ठहराया है। जिलानी के मुताबिक मस्जिद की जमीन के बदले दूसरी जमीन ना ली जा सकती है, ना ही दी जा सकती है। इस्लामी शरीयत और कानून के लिहाज से यह सही नहीं है। बाबरी मस्जिद के लिए लड़ाई लड़ते हुए आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पहले से ही जमीन लेने के पक्ष में नहीं रहा है। इसके साथ ही जिलानी का कहना है कि मुकदमे से संबंधित सभी दस्तावेजों में अयोध्या एक छोटा शहर है और फैजाबाद का हिस्सा है। इसलिए अब सरकार ने जिस तरह से पूरे जिले का नाम अयोध्या रख दिया है, तो शहर का नाम बदलने और उसकी नगरपालिका की सीमा का विस्तार करने का मतलब यह नहीं है कि जिस जमीन की पेशकश की गई है, वह अयोध्या में ही है।

वहीं मुस्लिम पक्षकार हसबुल्लाह बादशाह खान का कहना है कि रौहानी थाना क्षेत्र और सोहावाल तहसील में पहचानी गई जमीन अयोध्या में नहीं है। वहीं पक्षकार मोहम्मद उमर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अयोध्या में किसी भी प्रमुख स्थान पर जमीन आवंटित की जानी चाहिए, लेकिन आवंटित भूमि गांव में है और उसकी दूरी भी बेहद ज्यादा है। इसे लेने का कोई मतलब नहीं है। वहीं एक्शन कमेटी द्वारा बाबरी मस्जिद के अवशेष पर दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने को लेकर बाबरी के पक्षकार इकबाल अंसारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि अब हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे हिंदू और मुस्लिम के बीच का सद्भाव बिगड़े। हालांकि उनका कहना है कि पांच एकड़ जमीन अयोध्या में ही मिलनी चाहिए थी। मस्जिद के मलबे से हमें कोई लेना-देना नहीं है।

महंत नृत्यगोपाल दास का बना रहेगा मान-सम्मान
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर संतों में नाराजगी भी सामने आई। माना जा रहा था कि महंत नृत्यगोपाल दास को ही इसका अध्यक्ष बनाया जायेगा, लेकिन उनका नाम न होने के बाद संतों ने इस पर विरोध करना शुरू कर दिया और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। यहां तक कि अपनी रणनीति तय करने के लिए एक बैठक की भी घोषणा कर दी गई। महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना पूरा जीवन कुर्बान कर दिया, उनका इस ट्रस्ट में कहीं कोई नामो-निशान तक नहीं है। महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने कहा कि ट्रस्ट में शामिल विमलेश मोहन प्रताप मिश्रा राजनीतिक व्यक्ति हैं। वह बसपा से चुनाव लड़ चुके हैं। उनका राम जन्म भूमि से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे लोगों को क्यों राम जन्मभूमि ट्रस्ट में जगह दी गई है। राम मंदिर आंदोलन के समय ही कानून बना था कि वैष्णव ही राम जन्म भूमि का अध्यक्ष होगा। इसके बाद संतों को समझाने की कोशिश की गई। सूत्रों के मुताबिक महंत नृत्यगोपाल दास को समझाया गया कि कानूनी अड़चनों के कारण उनका नाम हटाना पड़ा। दरअसल बाबरी विध्वंस मामले में वह सीबीआई जांच में आरोपित हैं।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का स्वरूप

केन्द्र सरकार की ओर से बनाये गये ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य बनाये गये हैं। इनमें 9 स्थायी और 6 नामित सदस्य हैं। इस ट्रस्ट की निगरानी में ही अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण होगा।

के परासरन

के.परासरन ट्रस्ट के अध्यक्ष बनाये गये हैं। रामलला विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील के. परासरन का अदालत में इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने में बहुत बड़ा योगदान है। 92 वर्षीय परासन सेतु समुद्रम प्रॉजेक्ट के खिलाफ भी केस लड़ चुके हैं। उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान उन्होंने स्कन्ध पुराण के श्लोकों का जिक्र करके राम मंदिर के अस्तित्व पर दलील दी थी। परासरन तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल रहने के अलावा भारत के अटॉर्नी जनरल भी रहे हैं।

स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती

जगतद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को भी ट्रस्ट में शामिल किया गया है। वह राम मंदिर आंदोलन में 1984 से ही सक्रिय रहे हैं। उनका कहना है कि अयोध्या में जनता के पैसे से ही भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा। अब तक जनता से इकट्ठा किए गए 30 करोड़ से ज्यादा की धनराशि मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशने पर खर्च हो चुकी है जबकि एक करोड़ नौ हजार अभी भी राम जन्मभूमि न्यास के खाते में बची है। यह धनराशि भी मंदिर निर्माण के लिए नवगठित ट्रस्ट को सौंप दी जाएगी।

माधवाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी

कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के 33वें पीठाधीश्वर हैं। दिसम्बर 2019 में पेजावर मठ के पीठाधीश्वर स्वामी विश्वेशतीर्थ के निधन के बाद उन्होंने यह पदवी संभाली हुई है।

डॉ. अनिल कुमार मिश्र

अम्बेडकरनगर जिले के पहतीपुर के पतौना गांव के मूल निवासी डॉ. अनिल कुमार मिश्र होम्योपैथिक चिकित्सक हैं। राम मंदिर आंदोलन के दौरान विनय कटियार के साथ जुड़े थे। बाद में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े। डॉ. मिश्र फैजाबाद की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी में रहते हैं।

विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र

अयोध्या राज परिवार के वंशज विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र पहले सियासत में थे, लेकिन फिर उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। अयोध्या के मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल ने राम जन्मभूमि रिसीवर का चार्ज छोड़ विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को सौंप दिया है। विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र रामजन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के ट्रस्टी बनाए गए हैं।

कामेश्वर चौपाल

ट्रस्ट के दलित सदस्य के तौर पर नामित किए गए कामेश्वर चौपाल ने 1989 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुए एक शिलान्यास कार्यक्रम में राम मंदिर की पहली ईट रखी थी। कामेश्वर चौपाल बिहार से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं।

महंत दिनेंद्र दास

महंत दिनेंद्र दास अयोध्या के निर्मोही अखाड़ा के महंत हैं। दिनेंद्र दास 1992 में निर्मोही अखाड़ा के नागा बने, उसके बाद 1993 में पंच और उपसरपंच बना दिए गए। 2017 में यहां के सरपंच महंत भास्कर दास ने उन्हें पावर आॅफ अटॉर्नी दी। महंत भास्कर दास के निधन के बाद 2017 में पंचों ने उन्हे निमोर्ही अखाड़ा का महंत बना दिया।

युगपुरुष परमानंद जी महाराज

अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख परमानंद महाराज की वेदांत पर 150 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इन्होंने वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र में आध्यात्मिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को भी संबोधित किया था।

स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज

स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज रामायण, श्रीमद् भागवत गीता, महाभारत और अन्य पौराणिक ग्रंथों का देश विदेश में प्रवचन करते हैं। वह आध्यात्मिक गुरु पांडुरंग शास्त्री अठावले के शिष्य हैं।

 इसके अलावा बोर्ड आॅफ ट्रस्टी द्वारा नामित दो सदस्य बनाये जायेंगे। ये दोनों हिंदू धर्म से होंगे। इनका चयन बहुमत के आधार पर होगा।

 केंद्र सरकार बोर्ड में अपना एक प्रतिनिधि रखेगी जो आईएएस अधिकारी होगा। यह संयुक्त सचिव के पद से नीचे का व्यक्ति नहीं होगा। यह एक पदेन सदस्य होगा।

 ट्रस्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के दो प्रतिनिधि होंगे। हिंदू धर्म का प्रतिनिधि पहला पदेन सदस्य राज्य सरकार के सचिव या उससे ऊपर के स्तर का एक आईएएस अधिकारी होगा। इसके अलावा अयोध्या के जिलाधिकारी पदेन ट्रस्टी होंगे। वह हिंदू धर्म को मानने वाले होंगे। अगर किसी कारण से मौजूदा कलेक्टर हिंदू धर्म के नहीं हैं, तो अयोध्या के एडिशनल कलेक्टर (हिंदू धर्म) पदेन सदस्य होंगे।

 राम मंदिर विकास और प्रशासन से जुड़े मामलों के चेयरमैन की नियुक्ति ट्रस्ट करेगा। यह पदेन सदस्य हिंदू होगा।

ऐसे में उनके शामिल होने पर इस ट्रस्ट को अगर अदालत में चुनौती मिलती तो राम मंदिर निर्माण में और देरी होना तय था। इसके साथ ही बाबरी विध्वंस के आरोपित के तौर पर केन्द्र सरकार की ओर से उन्हें सीधे ट्रस्ट में शामिल करने पर एक गलत संदेश भी जाता और मामला फिर सियासी आरोप-प्रत्यारोप में उलझ जाता। ऐसे में बीच का रास्ता निकालते हुए महंत नृत्यगोपाल दास का नाम शामिल नहीं किया गया। इसके बाद संतों की नाराजगी दूर हुई। इन सबके बीच अभी भी उनको ट्रस्ट में शामिल करने का रास्ता खुला है। दरअसल ट्रस्ट के दो सदस्यों के चयन का अधिकार ट्रस्ट के चयनित सदस्यों को बहुमत के आधार पर दिया गया है। ऐसे में अगर इस रास्ते महंत नृत्यगोपाल दास व अन्य को शामिल किया जाता है तो बाबरी विध्वंस के आपराधिक मुकदमे सम्बन्धी नियम लागू नहीं होंगे। नाराजगी दूर करन के लिए विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र ने मणिरामदास जी की छावनी जाकर महंत नृत्यगोपालदास से भेंट की। महंत ने उन्हें अंगवस्त्र प्रदान कर ट्रस्ट में शामिल होने की बधाई दी। ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने भी महंत नृत्यगोपालदास सहित अन्य संतों से आशीर्वाद लिया। विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज ने भी मणिरामदास जी की छावनी जाकर कमलनयनदास से गोपनीय वार्ता की। संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास, विधायक वेदप्रकाश गुप्त एवं रामचंद्र यादव ने भी महंत नृत्यगोपालदास से भेंट की। एक के बाद एक इन मुलाकातों से यह सन्देश दिया गया है कि ट्रस्ट गठन के बाद संतों की जो नारागजी थी, उसे दूर कर लिया गया है और पहले की तरह की उनका मान सम्मान बना रहेगा।


 
Top