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प्राचीन चिकित्सा पद्धति के नये युग की शुरुआत

09/10/2019

प्राचीन चिकित्सा पद्धति के नये युग की शुरुआत

वीरेन्द्र मिश्र

फिट इण्डिया अभियान की शुरुआत के ठीक दूसरे दिन आयुष के, योग के विद्वानों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पहुंचना, नये भारत में चिकित्सा की हमारी प्राचीन प्रणाली के फिर से विकास का संकेत है। इस परंपरा और विरासत से जुड़े विद्वानों का सम्मान और हरियाणा में 10 आयुष स्वास्थ्य केन्द्रों का शुभारंभ बहुत कुछ कहता है। योग सेवा निकेतन से पूरे जापान में योग की धूम मचाने वाले योगी को प्रधानमंत्री ने सम्मानित किया और इटली से पहुंची एण्टीनीता रोजी को योग पुरस्कार देकर उनका मान बढ़ाया। बिहार स्कूल आॅफ योगा के स्वामी जी को भी सम्मानित किया गया। इस 30 अगस्त को राजधानी के विज्ञान भवन में आयुष पद्धत्ति को समृद्ध करने वाले 12 आयुष महापुरुषों की स्मृति में 12 डाक टिकट जारी किये गये। इन आयुष महापुरुषों ने योग,आयुर्वेद,यूनानी और होम्योपैथी से लोगों की सेवा की।

बारह आयुष महापुरुषों पर बारह डाक टिकट जारी करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिकित्सा की प्राचीन पद्धति में नये युग की ओर संकेत किया।

आज वह दिन भी आया है, जब आयुष मंत्रालय लोक स्वास्थ्य का माध्यम बन चुका है। इन विद्वानों की स्मृति में डाक टिकट प्रधानमंत्री मोदी ने लोकार्पित किया। समारोह की अध्यक्षता केन्द्रीय आयुष मंत्री (स्वंत्र प्रभार) श्रीपाद येशो नायिक ने की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय डाक विभाग को विशेष रूप से बधाई देते हुए, कहा कि वे ‘प्रधानमंत्री बने हैं, उसकी वजह से थोड़े ही डाक टिकट निकल रहे हैं। पहले ऐसा था कि बड़ा नाम हो, टी.वी. पर चमक हो, नेता कहे जाने वाले लोग हों, तो उन्हीं पर डाक टिकट निकलता रहता था। क्या कल तक आप सोच सकते थे कि आयुर्वेद पर काम करने वाले का भी डाक टिकट हो सकता है?’ नरेंद्र मोदी ने जोड़ा कि यही बदलता हिन्दुस्तान है और एक ही साथ, एक ही सेट में 12 डाक टिकट पहली बार निकले हैं। इसके साथ ही आयुर्वेद जगत का ही नहीं, अपितु आयुष का पूरा परिदृश्य खुल कर मुखर हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महत्वपूर्ण विचार की परिकल्पना तत्कालीन मंत्री मनोज सिन्हा जी ने की थी। वो यहां बैठे हुए हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह सभी 12 डाक टिकट आयुष के बारे में आम जनमानस के बीच नई सोच विकसित करेंगे। उन्होंने जोड़ा कि जिन मनीषियों पर डाक टिकट हैं, उनके परिजन के जन का दर्शन करने का मुझे अवसर मिला है। प्रधानमंत्री ने डॉक्टर दिनशा मेहता का विशेष उल्लेख करते हुए, उनके योगदान को रेखांकित किया। दिनशा मेहता की प्राकृतिक चिकित्सा का प्रभाव तब गांधी जी के जीवन पर भी पड़ा था। गांधी जी कहा करते थे कि प्राकृतिक चिकित्सा जीवन जीने का तरीका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वेदों में गम्भीर बीमारियों से जुड़े इलाज की चर्चा है, लेकिन दुर्भाग्य से हम अपनी पुरातन ज्ञान सम्पदा को आधुनिकता से जोड़ने में सफल नहीं रहे। बीते 5 वर्षों में हमने बदलाव लाने का प्रयास किया है। इसका वैज्ञानिक आधार भी तलाशा गया है, ताकि दुनिया इसे समझ सके। प्रधानमंत्री के भाषण के इस अंश के संदर्भ में बीते पांच वर्षों में केंद्र सरकार की ओर से आयुष क्षेत्र में बदलाव को देखना होगा।

विशेष रही विभूतियों के परिजन की उपस्थिति

समारोह में देश विदेश से विद्वान योगी, मनीषी और आयुर्वेद के विशेषज्ञों के अलावा 12 महान विभूतियों के परिजन भी शामिल हुए। आयुर्वेद जगत के पद्मविभूषण वैद्यराज वृहस्पति देव त्रिगुणा, भावातीत ध्यान से पूरब पश्चिम को जोड़ने वाले महर्षि महेश योगी, आयुर्वेद की पुनर्स्थापना में योगदान करने वाले और महामना मदन मोहन मालवीय के अनन्य सहयोगी रहे त्रयम्बकेश्वर (नासिक)के वैद्य शास्त्री शंकर दाजी पदे और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रथम प्रधानाचार्य वैद्य यादव जी त्रिकम जी आचार्य के परिजन तो समारोह में शामिल हुए ही- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्राकृतिक चिकित्सक रहे डॉ. दिनशा मेहता, सिद्ध चिकित्सा पद्धति के आचार्य और शब्दकोश लिखने वाले चिकित्सक टी.वी. सम्बाशिवम पिल्लई के परिजन भी आये। इसी तरह देश की आजादी के सेनानी और जामनगर आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रथम वैद्य भास्कर विश्वनाथ गोखले, गांधी जी की खादी के प्रबल प्रचारक, केरल के आयुर्वेद वैद्य भूषण के. राधवन थिरूमुलपाद के परिजन भी समारोह में थे। इन महापुरुषों में प्रथम राष्टपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. के.जी. सक्सेना, महामना मालवीय के सहयोग से तिब यूनानी चिकित्सा पद्वति स्थापित करने वालो में शामिल हकीम अब्दुल अजीज लखनवी और हकीम कबीरूद्वीन के योगदान को भी याद करते हुए उनकी स्मृतियों को नये भारत से जोड़ा गया।

उल्लेखनीय है कि प्रयोगशालाओं में अन्वेषण का ही परिणाम है कि लेह- लद्दाख की सावो रिकुआ’ पैथी को भी आयुष परिवार में शामिल कर लिया गया है। शीघ्र ही लेह में अंतरराष्ट्रीय स्तर का सावो रिकुआ केन्द्र की स्थापना होने जा रही है। पूरे देश में एक लाख, 50 हजार स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें आयुष को भी सहभागी बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पूरे देश में 12 हजार 500 आयुष केन्द्रों की भी स्थापना का लक्ष्य है। उनमें से ही पीएम ने हरियाणा के 10 केंद्रों का उद्घाटन विडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विज्ञान भवन वाले समारोह से ही किया। पीएम ने जानकारी दी कि इस वर्ष के अन्त तक ऐसे चार हजार आयुष स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना हो जायेगी। देश के लगभग सभी ब्लॉक में इस तरह के केंद्र होंगे। आयुष्मान भारत गरीब से गरीब व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य देने का जहां वादा पूरा कर रहा है, यह इलाज मुμत भी हो रहा है। इस कदम से 12 हजार करोड़ रुपयों की बचत की शुरुआत भी हो रही है। इसी तरह से हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना का भी लक्ष्य है।

इस तरह से जहां गंभीर बीमारियों का इलाज संभव होगा, वहीं एम.बी.बी.एस की करीब 16 हजार सीटें भी बढ़ जायेग्ांी। कह सकते हैं कि आयुष के विस्तार से यह स्वास्थ्य देने के साथ-साथ रोजगार मुहैया कराने की ओर भी बहुत बड़ा कदम होगा। इसके तहत गांव-गांव, शहर-शहर में युवाओं को मेडिकल और पैरा मेडिकल की व्यवस्था में कम पढ़े-लिखे से लेकर ज्ञानी िवज्ञानियों तक को काम मिल सकता है। अयुष में एक ईको सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें रोजगार के नये अवसर सामने आने वाले हैं। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में बल दिया कि पूरी दुनिया के सामने स्वास्थ्य का ये सुरक्षा कवच एक ब्रांड आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस बारे में दुनिया के 70 क्षेत्रों के साथ समझौता किया जा चुके है। दुनिया का कोई भी व्यक्ति कैसा भी हो, योग से जुड़ना चाहता है। सदियों से भारत के ऋषियों योगियों ने योग के लिए समर्पण किया और आज दुनिया उसी योग के प्रति समर्पित हो रही है। पीएम मोदी के ही भाषण से यह अंश निकाला जाए कि वे दुनिया में कहीं भी जाते हैं, चाहे जितना बड़ा लीडर हो, बात की शुरुआत योग से ही होती है। शायद ही कोई लीडर होगा जिसने हमारे प्रधानमंत्री के साथ कम से कम 10 मिनट योग पर बात न की हो। भारत का प्रयास है कि अब योग के बाद आयुष की दूसरी विधाओं को भी दुनिया में बढ़ाने का काम आरम्भ किया जाय। अब योग के पीछे आयुर्वेद भी चलेगा। वक्त बदल चुका है।

पुरानी परम्परा को छोड़ने की आदत को बदलना होगा। एक उदाहरण हल्दी का ही है, जो भारत के जीवन में रची-बसी है। हर उपचार में ये शामिल है लेकिन उसका महत्व हमने तब तक नहीं समझा, जब दुनिया उसे पेटेंट कराने के लिए भागने लगी। आज जो अन्न-भोजन हमने छोड़ दिया था, दुनिया उसे ही अपना रही है। जौ, ज्वार, रागी, कोदो, सांवा, बाजरा जैसे अनेक अनाज भारत के जीवन का हिस्सा थे। धीरे-धीरे हमारे भोजन की थाली से सब कुछ गायब हो गया, पौष्टिक तत्व गायब हो गये। इससे खाने की थाली में अमीरी-गरीबी का भेद भी उभर कर सामने आ गया। जिस अनाज को कोई मुμत में लेने को तैयार नहीं होता था, वो सैकड़ों रुपये किलो के हिसाब से आज मिल रही है। जरूरत है इन सबकी ग्लोबल मार्केटिंग करने की। आज आयुष को मेडिकल पर्यटन का हिस्सा बनाना होगा। मेडिकल और मेडिटेशन के लिए, जो भी जरूरी इंफ्रास्टक्चर की जरूरत है, उसको राज्य सरकारों की मदद से उपलब्ध कराना होगा। दुनिया में 5 सितारा होटल में भी अब जिम है, तो वहां मेडिटेशन सेंटर और योगा सेंटर भी बन रहे हैं। हवाई अड्डे पर भी ‘योगा-मेडिटेशन’ रूम बनाये जा रहे हैं। यही तो बदलाव है।


 
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