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भाई साहब नाराज हैं

07/03/2020

भाई साहब नाराज हैं

 राकेश कायस्थ

रिश्तों की यही मिठास मुझे एयरपोर्ट जाते वक्त खींचकर भाई साहब के द्वारका स्थित चार बेडरूम के नये नवेले μलैट तक ले आई थी। यह भाई साहब से दूसरी मुलाकात थी। उन्हें पता चला कि मैं दिल्ली में हूं, तो फौरन करके फौरन आदेश दिया- अगर बिना मिले और खाना खाये वापस चले गये तो बहुत बुरा होगा।

वे मेरे करीबी रिश्तेदार हैं..मेरे फुफेरे साढ़ू के सगे मौसेरे भाई! रिश्ता और करीब का होता अगर बुआ मुंहबोली ना होतीं। फुफेरे साढ़ू बहुत आत्मीय आदमी हैं और उनसे भी ज्यादा जिंदादिल हैं उनके वो मौसेरे भाई। रिश्ते में थोड़ा तकनीकी पेंच है, इसलिए मैं फुफेरे साढ़ू के उन मौसेरे भाई को सिर्फ भाई साहब बुलाता हूं। भाई साहब से मेरी पहली मुलाकात दिल्ली में एक शादी समारोह के दौरान हुई थी। भाई साहब ने बारात में कभी ना भूलने वाला नागिन डांस किया था। परिचय होते ही मैं उनकी गर्मजोशी का कायल हो गया था। भाई साहब ने मेरी आवभगत का जिम्मा खुद उठा लिया। चाट-पकौड़ी से लेकर बटर नान तक एक-एक चीजÞ आग्रह करके खिलाते रहे।
खाने के बाद वे हाथ पकड़े मिठाइयों वाले काउंटर पर ले गये। इसके पहले कि मैं कुछ कह पाता, उन्होंने कोई आधा किलो मूंग दाल का हलवा मेरे प्लेट में डाल दिया- ये तो आपको खाना ही पड़ेगा। हमारी दिल्ली की स्पेशल चीज है और कहीं नहीं मिलेगी आपको। मैने कहा कि ये बहुत ज्यादा है तो उन्होंने तुरंत दलील दी- अरे ज्यादा कहां है। मैं तुम्हारी उम्र का था तो इसके दोगुना चट कर जाता था। एक बार चख लोगे तो मुंह को ऐसा लगेगा कि छोड़ ही नहीं पाओगे। मैं कभी घी में डूबे मूंग दाल के हलवे को देखता था और कभी भाई साहब के चेहरे को। कहना मुश्किल था कि रिश्ते में ज्यादा मिठास थी या मूंग दाल के हलवे में। रिश्तों की यही मिठास मुझे एयरपोर्ट जाते वक्त खींचकर भाई साहब के द्वारका स्थित चार बेडरूम के नये नवेले μलैट तक ले आई थी।
यह भाई साहब से दूसरी मुलाकात थी। उन्हें पता चला कि मैं दिल्ली में हूं, तो फौरन करके फौरन आदेश दिया- अगर बिना मिले और खाना खाये वापस चले गये तो बहुत बुरा होगा। मैने चिरौरी की- शाम सवा चार बजे की μलाइट है। उन्होंने दलील दी- बस ये समझ लो, हम एयरपोर्ट के इतने नजदीक हंै कि चाहो तो μलाइट हमारी बालकनी से पकड़ लो। तो मैंने गाड़ी भाई साहब के घर की तरफ मुड़वा दी। मैं पता पूछता रहा और वे कहते रहे -बस चलते चलते चले जाओ, पांच मिनट और…. आखिर में जब मैं उनके घर पहुंचा तो सवा दो बज चुके थे। प्रचंड खातिरदारी में कब तीन बज गये, पता ही नहीं चला। हाथ धोते ही मैंने कहा कि अब तो भागना की पड़ेगा। वे हंसे- नौजवान पीढ़ी बड़ी बेसब्र है। डोमेस्टिक μलाइट में नियम 45 मिनट पहले पहुंचने का है।
अभी तो घंटा भर से ज्यादा बाकी है। मैं किसी तरह गिरता-पड़ता एयरपोर्ट पहुंचा। एयरलाइन के काउंटर पर पहुंचा तो मालूम हुआ कि बोर्डिंग बंद हो चुकी है और अगली μलाइट का टिकट लेने के अलावा कोई और चारा नहीं है। अगली μलाइट लेकर देर रात वापस मुंबई पहुंचा। μलाइट छूटने वाली बात भाई साहब को नहीं बताई। एकाध μलाइट छूटने से भला रिश्ते कहां छूटते हैं! तो मैं उसके बाद से भाई साहब से आमने-सामने कभी नहीं मिला हूं लेकिन रिश्ता बना हुआ है। व्हाट्स एप पर उनके गुड मॉर्निंग के मैसेज से मेरी आंख खुलती है। गुड मार्निंग और गुड नाइट के जवाब शुरू में मैं दे दिया करता था। लेकिन भाई साहब अब गुड मॉर्निंग और गुड नाइट के बीच दिन भर में कम से कम बीस-पच्चीस और मैसेज भेजने लगे हैं। आज भाई साहब ने मुझे गुड मॉर्निंग नहीं भेजा बल्कि उनकी एक शिकायत आई है। उन्होंने साफ-साफ पूछा है कि अगर मुझे उनके मैसेज पसंद नहीं आते तो वे आगे से भेजना बंद कर देंगे। मैने कहा- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है।
उन्होंने अगला सवाल किया है-अगर ऐसी कोई बात नहीं,तो फिर मैं कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं देता? मैंने कहा- भाई साहब आपकी शिकायत अपनी जगह ठीक हो सकती है लेकिन इन नौ उपायों से भूत-प्रेत आपके घर पर नहीं फटकेंगे वाले आपके मैसेज का क्या करूं? भूत अब तक आये ही नहीं तो उन्हें किस तरह भगा दूं? भाई साहब ने फौरन फोन रख दिया। लेकिन मैसेज भेजना बंद नहीं किया। पिछले कुछ दिनों से वे लगातार चुन.चुन ऐसे मैसेज भेज रहे हैंए जिनका संदेश यह है कि लोगों के पास सोशल मीडिया पर बिताने के लिए वक्त तो है लेकिन अपने रिश्तेदारों के लिए नहीं है। वक्त के साथ रिश्ते.नाते सब दूर हुए जा रहे हैं। मैं समझ सकता हूं कि भाई साहब अब भी नाराजÞ हैं। अगर आपके पास उनकी नाराजगी दूर करने का सुझाव हो तो मुझे जÞरूर बतायें।


 
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