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कश्मीरी छात्रों के अभिभावक बने योगी

02/11/2019

कश्मीरी छात्रों के अभिभावक बने योगी

मोहम्मद शहजाद

श्मीर हमारा है और कश्मीरी भी हमारे हैं। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार कश्मीर समस्या को हल करने की दिशा में प्रयासरत है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अध्यनरत कश्मीरी छात्रों से बातचीत करके अच्छी पहल की है। नि:संदेह इससे कश्मीरी बिरादरी में अच्छा संदेश जाएगा। लखनऊ के अपने सरकारी आवास 5, कालीदास मार्ग में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे में तालीम हासिल कर रहे कश्मीरी छात्रों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। उनकी इस दावत पर लगभग 70 कश्मीरी छात्र उनसे मिलने पहुंचे। इसमें अधिकतर अलीगढ़, गाजियाबाद और नोएडा के विभिन्न कॉलेजों और यूनिवर्सिटी समेत अन्य शैक्षिक संस्थानों में शिक्षा हासिल करने वाले छात्र शामिल थे। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी सुरक्षा प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कश्मीरी छात्रों का भरोसा जीतने के लिए सबसे पहले उन्हें यकीन दिलाया कि यह बातचीत इस कमरे से बाहर नहीं जाएगी। इसलिए वे बेखौफ होकर अपनी समस्याएं और बातें कहें। उनका यह अंदाज कश्मीरी छात्रों के दिलों को छूने के लिए काफी था। इसीलिए बातचीत का सिलसिला जब चला तो यह दूर तलक गया। कश्मीरी छात्रों ने इस दौरान उन्हें बताया कि उनकी सबसे बड़ी समस्या अपने घरवालों से लगभग दो माह से संपर्क न होना है। इस कारण उन्हें बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फीस और दूसरे खर्च के लिए वे पैसों की परेशानी से गुजर रहे हैं। इसपर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हम जल्द ही आपके परिजनों से आपकी बातचीत कराएंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से कश्मीरी छात्रों को ढाढ़स बंधाया, उससे उन्हें आभास हुआ होगा कि अब भारतीय राजनेता सदाशयता के जरिए कश्मीर समस्या को हल करने की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं।

कश्मीरी छात्रों ने इसके साथ ही घाटी में स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षिक संस्थाओं में पठन-पाठन की पूर्णत: बहाली का मुद्दा भी उठाया। इसपर मुख्यमंत्री ने कहा कि संभव है कि उनकी कुछ समस्याओं के लिए केंद्र से बात करनी पड़े, जबकि कुछ ऐसी भी समस्याएं भी हो सकती हैं जो जम्मू-कश्मीर प्रशासन से बात करने पर ही हल होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस बात से लगता है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कश्मीरी छात्रों ने उनके आमंत्रण को ठुकरा कर सुनहरा अवसर गंवा दिया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी ने एएमयू के कश्मीरी छात्रों को भी इस बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। छात्रों ने इस प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया था कि अनुच्छे-370 समेत उनकी समस्याएं मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। मुख्यमंत्री योगी द्वारा केंद्र सरकार व जम्मू- कश्मीर प्रशासन से बात करने का आश्वासन देने से एएमयू के कश्मीरी छात्रों की दलील बेमानी सी लगती है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय सहित तमाम छात्रों को मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आप भी हमारे बच्चे हैं। हम आपको यूं ही नहीं छोड़ सकते।

गौरतलब है कि घर से दूर शिक्षा ग्रहण करने के लिए जब कोई छात्र जाता है तो उसके लिए ‘लोकल गार्जियन’ की व्यवस्था की जाती है। ताकि मां-बाप की गैर मौजूदगी में छात्र की निगरानी हो सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने आचरण से कश्मीरी छात्रों के स्थानीय अभिभावक नजर आए और उन्होंने बातचीत के दौरान इसका जिक्र भी किया। योगी आदित्यनाथ ने कश्मीरी छात्रों को भरोसा दिलाया कि शीघ्र ही वह ऐसी व्यवस्था बनाएंगे, जिससे प्रदेश में रह रहे सभी कश्मीरी एक दूसरे से संपर्क में रह सकें। इस व्यवस्था की निगरानी वह स्वयं करेंगे। यही नहीं उन्होंने इमामबाड़ा, विधानसभा, घंटा घर, रूमी दरवाजा, अम्बेडकर पार्क और टुंडे कबाब समेत लखनऊ के धरोहरों से भी छात्रों को परिचित कराया ताकि उन्हें भी यह अहसास हो सके कि ‘मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं।’ कुल मिलाकर ऐसा लगता है कि चूंकि यह छात्र ही कश्मीर का भविष्य हैं। इसलिए उनका भरोसा जीत कर और प्यार-मोहब्बत के सहारे उनके अंदर की कश्मीरियत को जगा कर ही कश्मीर समस्या का हल निकाला जा सकता है। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की इस पहल का अन्य राजनेता भी अनुसरण कर सकते हैं।


 
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